Monday, March 4, 2024
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Avikari Shabd अविकारी शब्द – परिभाषा, भेद, प्रकार, उदाहरण

नीचे दिये गये वाक्यों या अविकारी शब्द के उदाहरण (Avikari Shabd Ke udahran) को पढ़िए और समझिए –

  • गाय धीरे-धीरे चल रही है ।
  • घोड़ा तेज दौड़ रहा है।

वाक्यों में क्रमशः ‘धीरे- धीरे’, ‘तेज’ अविकारी शब्द हैं।

Avikari Shabd Kise Kahate Hain अविकारी शब्द किसे कहते हैं

Avikari Shabd अविकारी शब्द

अविकारी शब्द की परिभाषा (Avikari Shabd Ki Paribhasha) = जिन शब्दों का लिंग, वचन, कारक, पुरुष और काल आदि के कारण रूप परिवर्तन नहीं होता है, उन्हें अविकारी शब्द (Avikari Shabd) कहते हैं।

अविकारी शब्द के भेद (Avikari Shabd Ke Bhed) अविकारी शब्द निम्नलिखित चार प्रकार के होते हैं =

  1. क्रिया विशेषण
  2. संबंध बोधक
  3. समुच्च बोधक या योजक
  4. विस्मयादि बोधक

(1) क्रिया विशेषण = जो शब्द क्रिया की विशेषता प्रकट करते हैं, उन्हें क्रिया विशेषण कहते हैं। जैसे – वह कल दिल्ली जाएगा। इस वाक्य में ‘कल’ शब्द क्रिया की विशेषता प्रकट कर रहा है। अतः ‘कल’ क्रिया विशेषण शब्द है।

क्रिया विशेषण के भेद (Kriya Visheshan Ke Bhed)

क्रिया विशेषण चार प्रकार के होते हैं –
(अ) कालवाचक क्रिया विशेषण
(ब) स्थानवाचक क्रिया विशेषण
(स) रीतिवाचक क्रिया विशेषण
(द) परिमाणवाचक क्रिया विशेषण

(अ) कालवाचक क्रिया विशेषण = जिस क्रिया विशेषण से कार्य के होने का समय पता चले, उन्हें कालवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं। जैसे-वह अभी आया है। में आज जाऊँगा। इन वाक्यों में ‘अभी ‘ और ‘आज’ कालवाचक क्रिया विशेषण हैं।
(ब) स्थानवाचक क्रिया विशेषण = जिस क्रिया विशेषण से किसी क्रिया के होने का स्थान ज्ञात हो, उसे स्थानवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं। जैसे- बाईं ओर चलो। आप इधर बैठिए। इन वाक्यों में ‘बाईं’ और ‘इधर’ स्थान वाचक क्रिया विशेष हैं।
(स) रीतिवाचक क्रिया विशेषण = जो क्रिया विशेषण क्रिया की रीति- का ज्ञान कराते हैं, उन्हें रीतिवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं। जैसे- धीरे-धीरे मत पढ़ो। काम जल्दी करो। इन वाक्यों में ‘धीरे-धीरे’ और ‘जल्दी’ शब्द रीतिवाचक क्रिया विशेषण हैं।
(द) परिमाणवाचक क्रिया विशेषण = जिन क्रिया विशेषणों से क्रिया के परिमाण का ज्ञान होता है, उन्हें परिमाणवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं। जैसे- अंकुर बहुत बोलता है। इतना दूध पर्याप्त है। इन वाक्यों में ‘बहुत’ और ‘इतना’ परिमाणवाचक क्रिया विशेषण हैं।

(2) संबंध बोधक = वे शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उनका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से बताते हैं, उन्हें संबंध बोधक कहते हैं। जैसे-परिश्रम के बिना धन नहीं आता। रमेश मित्रों सहित मेला देखने गया।

इन वाक्यों में ‘के बिना’ और ‘सहित’ शब्द संज्ञा के बाद आये हैं। ये शब्द संज्ञाओं का संबंध वाक्य के दूसरे शब्द से बता रहे हैं। अतः ये संबंध बोधक शब्द हैं।

संबंध बोधक के प्रकार :

प्रमुख रूप से संबंध बोधक के निम्नलिखित प्रकार हैं –
(1) कालवाचक – आगे, पीछे, पहले, बाद, पश्चात्, उपरान्त आदि।
(2) स्थानवाचक – अन्दर, बाहर, ऊपर, नीचे, मध्य, भीतर आदि।
(3) साधनवाचक – द्वारा, जरिये, निमित्त, सहारे, मार्फत आदि।
(4) दिशावाचक – ओर, पास, निकट, समीप, सामने, दूर आदि।
(5) विरोधसूचक – विरुद्ध, उल्टे, विपरीत, खिलाफ आदि।
(6) समानता सूचक – सम, समान, भर, तक, सदृश, अनुरूप, अनुसार आदि।
(7) हेतु वाचक – वास्ते, लिए, कारण, हेतु, अतिरिक्त आदि।
(8) विषय सूचक – भरोसे, बाबत, विषय आदि।
(9) साथ सूचक – साथ, संग, सहित, समेत, वश आदि।
(10) संग्रह वाचक – भर, तक, पर्याप्त, मात्र आदि।

(3) समुच्चय बोधक या योजक = दो शब्दों, वाक्यांशों और वाक्यों को जोड़ने वाले शब्दों को समुच्चय बोधक या योजक कहते हैं। जैसे – राजा और देवू विद्यालय जा रहे हैं। सौरभ अच्छा खिलाड़ी ही नहीं बल्कि अच्छा चित्रकार भी है। इन वाक्यों में ‘और’ तथा ‘बल्कि’ शब्द दो शब्दों या दो वाक्यों को जोड़ने का काम कर रहे हैं। अतः ये योजक शब्द हैं।

समुच्चय बोधक के भेद : समुच्चय बोधक दो प्रकार के होते हैं –
(अ) समानाधिकरण समुच्चय बोधक
(ब) व्याधिकरण समुच्चय बोधक

(अ) समानाधिकरण समुच्चय बोधक = वे शब्द जो समान और स्वतन्त्र शब्दों, वाक्याशों या वाक्यों को मिलाते हैं, उनहें समानाधिकरण समुच्चय बोधक कहते हैं। जैसे-माता और पिता की सेवा करो। तुम जाओगे या मैं। इन वाक्यों में ‘और’ तथा ‘या’ शब्द समानाधिकरण समुच्चय बोधक हैं, क्योंकि ये शब्द एक शब्द को दूसरे शब्द को जोड़ते हैं।
(ब) व्याधिकरण समुच्चय बोधक = वे अव्यय जो एक प्रधान वाक्य में एक या एक से अधिक आश्रित वाक्य जोड़ते हैं। उन्हें व्याधिकरण समुच्च बोधक कहते हैं। जैसे-यदि सफलता चाहते हो तो परिश्रम करो। वह बीमार था इसलिए अवकाश पर रहा। इन वाक्यों में ‘यदि-तो’, ‘इसलिए’ शब्द वाक्य को जोड़ते हैं। अतः ये शब्द व्याधिकरण समुच्चय बोधक हैं।

(4) विस्मयादि बोधक = वे शब्द जो आश्चर्य, शोक, घृणा, प्रशंसा आदि भावों को प्रकट करते हैं, उन्हें विस्मयादि बोधक कहते हैं। जैसे-अरे! मुन्नी तुम कब आई? शाबाश! तुम दौड़ में प्रथम आए। इन वाक्यों में ‘अरे’ और ‘शाबाश’ शब्द मन के भावों को प्रकट कर रहे हैं। अतः ये शब्द विस्मयादि बोधक हैं।

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