Sunday, June 23, 2024
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Sangya Kise Kahate Hain संज्ञा किसे कहते हैं – परिभाषा, भेद, प्रकार एवं उदाहरण

क्या आपको पता है कि संज्ञा किसे कहते हैं ? Sangya Kise Kahate Hain ? अगर नहीं तो कोई बात नहीं, इस आर्टिकल को पूरा पढ़े और जाने कि संज्ञा किसे कहते हैं। इस लेख की मदद से आज आप जानेगे कि संज्ञा किसे कहते हैं (Sangya Kise Kehte Hai), संज्ञा की परिभाषा (Sangya Ki Paribhasha), संज्ञा के कितने भेद हैं (Sangya Ke Kitne Bhed Hai), संज्ञा के प्रकार (Types of Sangya), और संज्ञा के उदाहरण (Sangya Ke Udaharan और Sangya Examples in Hindi) के बारे में।

Sangya Kise Kahate Hain संज्ञा किसे कहते हैं

Sangya

Sangya (संज्ञा) = वैसे विकारी शब्द को संज्ञा कहते हैं जिससे किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान तथा भाव आदि के नाम का बोध प्रकट होता है। प्रसिद्ध व्याकरणशास्त्री कामता प्रसाद गुरू के अनुसार – किसी कल्पित सृष्टि की वस्तु का नाम सूचित हो – जैसे – मोहन, गाय, हिमालय, गंगा, मिठास, घर, आकाश, देवता, अक्षर, बल, जादू, दिल्ली, श्याम, हिमालय, सोना, चांदी, कुत्ता इत्यादि। Sangya संज्ञा is the name of a person, thing, place or idea, example – Sohan, Girl, Boy, Delhi, Mumbai, Beauty आदि।

संज्ञा की परिभाषा (Sangya Ki Paribhasha) = किसी प्राणी, वस्तु, भाव या स्थान का बोध कराने वाले शब्द को संज्ञा कहते हैं।

संज्ञा के भेद (Sangya Ke Bhed) = मुख्यरूप से संज्ञा के पाँच भेद होते हैं।

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा
  2. जातिवाचक संज्ञा
  3. भाववाचक संज्ञा
  4. समूहवाचक संज्ञा
  5. द्रव्यवाचक संज्ञा

(1.) व्यक्तिवाचक संज्ञा

जो किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराये, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – रोहन ( व्यक्ति विशेष), साईकल (वस्तु विशेष), राजस्थान (स्थान विशेष) आदि।

व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध करने का मतलब “व्यक्तियों के नाम”, “देशों के नाम”, “राष्ट्रीय जातियों के नाम”, “नदियों के नाम”, “पहाड़ों के नाम”, “समुद्रों के नाम”, “पुस्तकों के नाम”, “समाचार पत्रों के नाम”, “नगरों, सड़कों और चौकों के नाम”, “दिनों एवं महीनों के नाम”, “त्यौहारों एवं उत्सवों के नाम”, “ऐतिहासिक युद्धों और घटनाओं के नाम”, “दार्शनिक तथ्यों के नाम” है। जैसे नरेश, अफगानी, गंगा, एवरेस्ट, हिन्द महासागर, रामायण, दैनिक जागरण, लखनऊ, सोमवार, मंगलवार, दीपावली, होली, पानीपत का युद्ध, ईश्वर आदि।

व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ अर्थहीन होती है। इनके प्रयोग से जिस व्यक्ति का बोध होता है, उसका कोई भी धर्म इनसे सूचित नहीं होता है। गंगा नाम से एक ही नदी का अथवा एक ही स्त्री का और किसी एक व्यक्ति का बोध हो सकता है किन्तु इस नाम के व्यक्ति का कोई भी धर्म सूचित नहीं होता। व्यक्तिवाचक संज्ञा किसी व्यक्ति की पहचान सूचना के लिए एक संकेत है और यह संकेत बदला जा सकता है।

(2.) जातिवाचक संज्ञा

जो किसी सम्पूर्ण पदार्थ या समूह आदि का बोध कराये, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – घोड़ा, कुर्सी, कक्षा आदि। किसी जाति के सम्पूर्ण पदार्थों को बोध करना जैसे “पशु-पक्षियों के नाम”, “वस्तुओं के नाम”, “प्राकृतिक आपदाओं के नाम”, “सामाजिक संबंधों, पदों और कार्यों के नाम” होता है। जैसे हाथी, गाय, दुकान, भवन, ज्वालामुखी, नेता, लोहार, कुम्हार आदि।

मुख्यतः पहचान के लिए मनुष्यों और स्थानों को विशेष नाम देना आवश्यक है। लेकिन इसकी कोई आवश्यकता नहीं है कि प्रत्येक प्राणी या पदार्थ को कोई विशेष नाम दिया जाये। इसलिए अधिंकाश पदार्थों का बोध जातिवाचक संज्ञाओं से हो जाता है।

(3.) भाववाचक संज्ञा

जो किसी भाव, गुण, दशा आदि का बोध कराये, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे-सफेदी, कालिमा, जवानी, मिठास आदि। भाववाचक संज्ञा की रचना होती है – (1) जातिवाचक संज्ञा से, (2) विशेषण शब्दों से, (3) क्रिया से, (4) सर्वनाम से, (5) अव्यय शब्दों से।

भाववाचक संज्ञाओं का निर्माण निम्नानुसार इन पाँच आधारों पर किया जा सकता है।

जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा का निर्माण

जातिवाचक संज्ञा – भाववाचक संज्ञा

  1. मित्र – मित्रता
  2. साधु – साधुता
  3. देव – देवता
  4. स्त्री – स्त्रीत्व
  5. पशु – पशुत्व
  6. लड़का – लड़कपन
  7. बच्चा – बचपन
  8. चोर – चोरी
  9. बूढ़ा – बुढ़ापा
  10. पूजा – पुजापा
  11. मूर्ख – मूर्खता
  12. पण्डित – पण्डिताई
  13. दास – दासता

विशेषण से भाववाचक संज्ञा का निर्माण

विशेषण – भाववाचक

  1. गुरू- गुरूत्व
  2. स्वाधीन – स्वाधीनता
  3. ऊँचा – ऊँचाई
  4. बुरा – बुराई
  5. दूर – दूरी
  6. अपना – अपनापन
  7. मीठा – मिठास
  8. कठोर – कठोरता
  9. कपड़ा – कडाई
  10. गोरा – गोराई
  11. गर्म – गर्मी
  12. सर्द – सर्दी

क्रिया से भाववाचक संज्ञा का निर्माण

क्रिया – भाववाचक संज्ञा

  1. घबराना – घबराहट
  2. दिखाना – दिखावट
  3. पढ़ाना – पढ़ाई
  4. चढ़ना – चढ़ाना
  5. उतरना – उतार
  6. बुलाना – बुलावा
  7. मारना – मार
  8. दौड़ना – दौड़
  9. चढ़ना – चढाई
  10. गिरना – गिरावट

सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा का निर्माण

सर्वनाम – भाववाचक संज्ञा

  1. अपना – अपनापन
  2. पराया – परायापन
  3. अहम् – अहंकार
  4. आप – आपा
  5. निज – निजत्व
  6. अहं – अहंकार
  7. मम – ममत्व

अव्यय से भाववाचक संज्ञा का निर्माण

अव्यय – भाववाचक संज्ञा

  1. समीप – समीपता
  2. निकट – निकटता
  3. दूर – दूरी
  4. परस्पर – पारस्पर्य
  5. वाहवाह – वाहवाही
  6. शाबाश – शाबाशी
  7. खूब – खूबी

अंग्रेजी व्याकरण के आधार पर कुछ विद्वान संज्ञा के और दो भेद (1) समुदायवाचक और (2) द्रव्यवाचक मानते हैं लेकिन हिन्दी व्याकरण में ये दोनों भेद जातिवाचक संज्ञा के अन्तर्गत आते हैं। फिर भी जानकारी की दृष्टि से इन्हें अलग से वर्णित किया जा रहा है।

(4.) समूहवाचक संज्ञा

जिस संज्ञा शब्द से किसी समुदाय या समूह का बोध होता है, उसे समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – सेना, सभा, कक्षा, परिवार आदि।

(5.) द्रव्यवाचक संज्ञा

जिससे किसी धातु या द्रव्य का बोध होता है उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं। इस संज्ञा का प्रायः बहुवचन नहीं होता। जैसे – जैसे – तेल, चाँदी, दूध, लोहा, कोयल, चावल, पानी, दही आदि।

संज्ञा का आधुनिक वर्गीकरण

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि कुछ विद्ववानों द्वारा संज्ञा का आधुनिक वर्गीकरण भी किया गया हैं। संज्ञा के आधुनिक वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है।

क) सजीवता और निर्जीवता के आधार पर इस प्रकार दो भेद बतायें गए है:
1 प्राणिवाचक संज्ञा – जिससे किसी सजीव प्राणी का बोध हो जैसे लड़का, लड़की, कुत्ता, कौआ, घोड़ा, बिल्ली आदि।
2 अप्राणिवाचक संज्ञा जिससे किसी गतिहीन, जड़, निर्जीव, वस्तुओं के नामों का बोध हो कलम, दावात, मेज, कुर्सी इत्यादि।

ख) गणना के आधार पर संज्ञा को मुख्यत दो भागों में बाँटा गया हैं :
1 गणनीय संज्ञा – इसके अन्तर्गत सभी जातिवाचक और समूहवाचक संज्ञा आते हैं। गणना का मतलब वचन से माना गया है। जिन संज्ञाओं में एकवचन और बहुवचन हो वे इसके अन्तर्गत आयेंगी। जैसे लड़का, लड़की, कुर्सी, मेज, घर, पेड इत्यादि ।
2 अगणनीय संज्ञा – इसके अन्तर्गत व्यक्तिवाचक और भाववाचक संज्ञाएँ आती है। इनका प्रयोग सदा एकवचन में ही होती है। जैसे – राम, सीता, गेहूँ चना, दया, ममता, सुन्दरता, बुखार आदि ।

ग) व्युत्पत्ति के आधार पर संज्ञा के तीन भेद हैं :
1 रूढ़ – वैसे नाम पद जो अखंडनीय हों – आम, केला, माँ, घर आदि।
2 यौगिक – जिनका सार्थक खण्ड हो सके। जैसे पुस्तक, हिमालय, रसोईघर, विद्यालय, सभागार आदि।
3 योगरूढ़ – सार्थक खण्ड होने के साथ एक विशेष अर्थ देनेवाले शब्द। जैसे लम्बोदर, सरोज, अम्बुज, शशिशेखर आदि।

संज्ञा, क्रिया, विशेषण और विशेष्य का रिश्ता –

विशेषण – जो शब्द संज्ञा और सर्वनाम की विशेषता बतावे उन्हें विशेषण कहा जाता है । विशेषण के संदर्भ में संज्ञा को विशेष्य भी कहा जाता है।
विशेष्य – विशेषण जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते है उसे विशेष्य कहा जाता है । विशेष्य या तो संज्ञा रूप में होता है अथवा क्रिया-रूप में।
जैसे –

संज्ञा – पुरूष – विशेषण – पौरूषेय
क्रिया – हँसना – विशेषण – हँसोड़
क्रिया – झगड़ना – विशेषण – झगड़ालू

इनमें पुरूष, हँसना, झगड़ना आदि विशेष्य कहें जायेगें। विभिन्न प्रव्ययों के योग से बने विशेषणों के कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित है।

संज्ञा विशेषण

  1. अंकुर – अंकुरित
  2. अज्ञान – अज्ञानी
  3. अनुराग – अनुरक्त
  4. आत्मा – आत्मिक
  5. अर्थ – आर्थिक
  6. अग्नि – आग्नेय
  7. अंश – आंशिक
  8. अन्तर – आन्तरिक
  9. उत्कर्ष – उत्कृष्ट
  10. उद्धरण – उद्धत
  11. उपकार – उपकारी
  12. उत्तेजना – उत्तेजित
  13. अवश्य – आवश्यक
  14. ऋण – ऋणी
  15. अपेक्षा – अपेक्षित
  16. अणु – आणविक
  17. अपमान – अपमानित
  18. अंग – आंगिक
  19. अधिकार – अधिकारी
  20. अंचल – आंचलिक
  21. अनुवाद – अनुवादित
  22. अलंकार – अलंकृत
  23. आदर – आदरणीय
  24. अपराध – अपराधी
  25. अनुभव – अनुभवी
  26. अनुमान – अनुमानित
  27. अभिषेक – अभिषिक्त
  28. आशा – आशान्वित
  29. आनन्द – आनन्दित
  30. आकाश – आकाशीय
  31. आश्रय – आश्रित
  32. आसक्ति – आसक्त
  33. आकर्षण – आकृष्ट
  34. आराधना – आराध्य
  35. इतिहास – ऐतिहासिक
  36. ईश्वर – ईश्वरीय
  37. उपेक्षा – उपेक्षित
  38. आसमान – आसमानी
  39. इच्छा – ऐच्छिक
  40. ईर्ष्या – ईर्ष्यालु
  41. आसन – आसीन
  42. दूध – दुधिया
  43. देह – दैहिक
  44. धन – धनी
  45. उत्साह – उत्साहित
  46. घन – घनी
  47. उद्योग – औद्योगिक
  48. धूम – धूमिल
  49. उन्नति – उन्नत
  50. नगर – नागरिक
  51. उपयोग – उपयुक्त
  52. नाव – नाविक
  53. उपार्जन – उपार्जित
  54. न्याय – न्यायी
  55. ओज – ओजस्वी
  56. निज – निजी
  57. कर्म – कर्मठ
  58. नियम – नियमित
  59. क्रम – क्रमिक
  60. निराशा – निराश
  61. कर्ज – कर्जदार
  62. नीति – नैतिक
  63. कंपन – कंपित
  64. पशु – पाश्विक
  65. कपट – कपटी
  66. पल्लव – पल्लवित
  67. कृपा – कृपालु
  68. कंलक – कलंकित
  69. करूणा – कारूणिक
  70. काम – कामी
  71. कागज – कागजी
  72. कुटुम्ब – कौटुम्बिक
  73. निर्माण – निर्मित
  74. दिन – दैनिक
  75. निश्चय – निश्चित
  76. देव – दैवी
  77. निषेध – निषिद्ध
  78. देश – देशी
  79. नोक – नुकीला
  80. धर्म – धार्मिक
  81. पक्ष – पाक्षिक
  82. नमक – नमकीन
  83. पहाड़ – पहाड़ी
  84. नरक – नारकीय
  85. क्रोध – क्रोधी
  86. खतरा – खतरनाक
  87. कथन – कथित
  88. कल्पना – कल्पित
  89. काँटा – कँटीला
  90. काल – कालिक
  91. खून – खूनी
  92. कुल – कुलीन
  93. गर्म – गर्मी
  94. केन्द्र – केन्द्रीय
  95. ग्राम – ग्रामीण
  96. खर्च – खर्चीला
  97. घर – घरेलू
  98. खाना – खाद्य
  99. घमंड – घमंडी
  100. खेल – खेलाड़ी
  101. चमक – चमकीला
  102. गठन – गठीला
  103. चमत्कार – चमत्कृत
  104. गुण – गुणी
  105. चिन्ह – चिन्हित
  106. घृणा – घृणित
  107. छबि – छबीला
  108. चर्चा – चित्रित
  109. जल – जलीय
  110. चरित्र – चारित्रिक
  111. जाति – जातीय
  112. चित्र – चित्रित
  113. डर – डरपोक
  114. चिन्ता – चिन्तित
  115. तर्क – तार्किक
  116. छाया – छायादार
  117. त्याग – त्यागी
  118. जहर – जहरीला
  119. तेज – तेजस्वी
  120. झगड़ा – झगड़ालू
  121. दया – दयालु
  122. तत्व – तात्विक
  123. दर्शन – दार्शनिक
  124. तरंग – तरंगित
  125. दान – दानी
  126. तिरस्कार – तिरस्कृत
  127. तंत्र – तांत्रिक
  128. नाटक – नाटकीय
  129. दम्पति – दाम्पत्य
  130. निन्दा – निन्दनीय
  131. दर्द – दर्दनाक

संज्ञा से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर –

प्रश्न – संज्ञा के कितने भेद होते हैं? (Sangya Ke Kitne Bhed Hote Hai?)
उत्तर – संज्ञा के पांच भेद होते हैं: व्यक्तिवाचक संज्ञा, जातिवाचक संज्ञा, भाववाचक संज्ञा, द्रव्यवाचक संज्ञा और समूहवाचक संज्ञा।

निष्कर्ष (Conclusion)

तो इस लेख में हमने आपको संज्ञा के बारे में सब कुछ बताया है। इस लेख की मदद से आज अपने जाना कि संज्ञा किसे कहते हैं (Sangya Kise Kehte Hai), संज्ञा की परिभाषा (Sangya Ki Paribhasha), संज्ञा के कितने भेद हैं (Sangya Ke Kitne Bhed Hai) और संज्ञा के प्रकार (Types of Sangya) के बारे में।

अब तो आपको पता चल ही गया होगा कि संज्ञा किसे कहते हैं। तो अब अगर आपसे कोई पूछे कि संज्ञा किसे कहते हैं (Sangya Kise Kahate Hain) तो आप आसानी से बता पाएंगे और अगर फिर भी आपको कोई परेशानी आए तो हमे जरूर बताए, हम आपकी अवश्य सहायता करेंगे।

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