Tuesday, February 20, 2024
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Chatravas se Pitaji ko Patra छात्रावास से पिताजी को पत्र

Write a letter to father regarding Hostel. छात्रावास के संबंध में पुत्र का पिताजी को पत्र। Chatravas se Pitaji ko Patra Hindi mein.

Chatravas se Pitaji ko Patra छात्रावास से पिताजी को पत्र

Chatravas se Pitaji ko Patra

अपनी छात्रावास की दिनचर्या एवं अपना कुशल-क्षेम बताते हुए पत्र लिखिए। Chatravas se Pitaji ko Patra likhiye aur Chatravas ki dincharya ke bare me btaye.

कमरा नं. 18 सनातन धर्म विद्या छात्रावास,
देहरादून
6.8.2015

पूज्य पिताजी,

सादर प्रणाम। आपका स्नेह-भरा पत्र कल ही मिला और पढ़कर अच्छा लगा की आप मेरी इतनी चिंता करते है। आपकी बताई हुई शिक्षाओं पर चलने का मैं पूर्ण प्रयत्न करूँगा। इस समय तक मैंने केवल दो ही छात्रों से मित्रता की है। उन्हीं के साथ अधिकतर उठना-बैठना रहता है और पढ़ाई-लिखाई में भी हम एक-दूसरे को पूरा सहयोग देते हैं। वैसे मेरा सभी से मेलजोल है। सभी विद्यार्थियों का मेरे प्रति स्नेह है पर रोहित और जेस्पर ही मेरे करीबी मित्र है।

सुबह उठने से लेकर रात के सोने तक मैंने अपना कार्यक्रम निश्चित कर लिया है और उसके अनुसार ही कार्य करता हूँ। छात्रावास में हमारा जीवन बहुत नियमबद्ध है। समय व्यर्थ नष्ट करने का अवसर ही नहीं आता। हम सभी विद्यार्थी प्रातः 5 बजे उठ जाते हैं, उसके पश्चात् शौच, व्यायाम, योग, स्नानादि से निवृत्त होकर यज्ञशाला में एकत्रित होते हैं। यज्ञशाला में संध्या एवं हवन प्रतिदिन होता है। फिर हम लोग प्रातराश (नाश्ता) लेने के बाद अपने कमरों में बैठकर स्वाध्याय करते हैं। भोजन भी ठीक समय पर मिलता है। इसके बाद विद्यालय की पढ़ाई आरंभ हो जाती है। विद्यालय में पढ़ने के उपरांत हम लोग हॉकी, वालीबाल, फुटबाल आदि खेलते हैं। सायंकाल पुनः ‘संध्या’ करते हैं और उसके पश्चात् भोजन करके पढ़ते-लिखते हैं। फिर प्रायः सभी विद्यार्थी दस बजे सो जाते है।

पिताजी, यहाँ का नियमित जीवन मुझे बहुत ही प्रिय है। पढ़ाई में खूब परिश्रम कर रहा हूँ और देखना मैं ही परीक्षा में प्रथम आऊंगा। पूजनीया माताजी को सादर प्रणाम। नरेश और आशा को सस्नेह नमस्ते।

आपका प्रिय पुत्र
हंसराज

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