Wednesday, June 19, 2024
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Saraswati Chalisa श्री सरस्वती चालीसा – Lyrics in Hindi, PDF & Meaning

Saraswati Chalisa – Read Saraswati Chalisa in Hindi lyrics. सरस्वती चालीसा हिंदी में पढ़ें। Here is Saraswati Chalisa (श्री सरस्वती चालीसा) along with Saraswati Chalisa PDF & Saraswati Chalisa meaning in Hindi.

Saraswati Chalisa सरस्वती चालीसा

Saraswati Chalisa सरस्वती चालीसा | meaningfulhindi
Saraswati Chalisa सरस्वती चालीसा

Maa Saraswati Chalisa Lyrics in Hindi

॥ दोहा ॥
जनक जननि पद कमल रज,निज मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। रामसागर के पाप को, मातु तुही अब हन्तु॥

॥ चौपाई ॥

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥
जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥
रूप चतुर्भुजधारी माता। सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती। जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥
तबहि मातु ले निज अवतारा। पाप हीन करती महि तारा॥
बाल्मीकि जी थे बहम ज्ञानी। तव प्रसाद जानै संसारा॥
रामायण जो रचे बनाई। आदि कवी की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता। तेरी कृपा दृष्टि से माता॥
तुलसी सूर आदि विद्धाना। भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा। केवल कृपा आपकी अम्बा॥
करहु कृपा सोइ मातु भवानी। दुखित दीन निज दासहि जानी॥
पुत्र करै अपराध बहूता। तेहि न धरइ चित सुन्दर माता॥
राखु लाज जननी अब मेरी। विनय करूं बहु भांति घनेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा। कृपा करउ जय जय जगदंबा॥
मधु कैटभ जो अति बलवाना। बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना॥
समर हजार पांच में घोरा। फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥
मातु सहाय भई तेहि काला। बुद्धि विपरीत करी खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी। पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥
चंड मुण्ड जो थे विख्याता। छण महुं संहारेउ तेहि माता॥
रक्तबीज से समरथ पापी। सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी॥
काटेउ सिर जिम कदली खम्बा। बार बार बिनवउं जगदंबा॥
जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा। छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥
भरत-मातु बुधि फेरेउ जाई। रामचन्द्र बनवास कराई॥
एहि विधि रावन वध तुम कीन्हा। सुर नर मुनि सब कहुं सुख दीन्हा॥
को समरथ तव यश गुन गाना। निगम अनादि अनंत बखाना॥
विष्णु रूद्र अज सकहिं न मारी। जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥
रक्त दन्तिका और शताक्षी। नाम अपार है दानव भक्षी॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा। दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥
दुर्ग आदि हरनी तू माता। कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
नृप कोपित जो मारन चाहै। कानन में घेरे मृग नाहै॥
सागर मध्य पोत के भंगे। अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में। हो दरिद्र अथवा संकट में॥
नाम जपे मंगल सब होई। संशय इसमें करइ न कोई॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई। सबै छांड़ि पूजें एहि माई॥
करै पाठ नित यह चालीसा। होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा॥
धूपादिक नैवेद्य चढावै। संकट रहित अवश्य हो जावै॥
भक्ति मातु की करै हमेशा। निकट न आवै ताहि कलेशा॥
बंदी पाठ करें शत बारा। बंदी पाश दूर हो सारा॥
करहु कृपा भवमुक्ति भवानी। मो कहं दास सदा निज जानी॥

॥ दोहा ॥

माता सूरज कान्ति तव,अंधकार मम रूप। डूबन ते रक्षा करहु,परूं न मैं भव-कूप॥
बल बुद्धि विद्या देहुं मोहि,सुनहु सरस्वति मातु। अधम रामसागरहिं तुम,आश्रय देउ पुनातु॥

||इति श्री सरस्वती चालीसा समाप्त ||

सरस्वती चालीसा के बारे में जानकारी – सरस्वती चालीसा एक भक्ति पाठ है जो ज्ञान, संगीत, कला, बुद्धि और शिक्षा की हिंदू देवी माँ सरस्वती को समर्पित है। सरस्वती चालीसा का महत्व भक्तों, छात्रों और कलाकारों के लिए निम्नलिखित तरीकों से निहित है जैसे कि “शैक्षणिक सफलता, रचनात्मकता और ज्ञान प्राप्ति के लिए”, “सीखने की क्षमता, स्मृति और बुद्धि में वृद्धि के लिए” आदि। इनके साथ-साथ “व्यक्ति की वाणी, संचार कौशल और सार्वजनिक बोलने में आत्मविश्वास के लिए”, “आंतरिक विकास, आत्म-जागरूकता के लिए”, “मन और विचार शुद्ध करने के लिए” भी आप श्री सरस्वती चालीसा का जाप करके देवी सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है।

Information About Saraswati Chalisa – Saraswati Chalisa is a devotional Path (पाठ) dedicated to Maa Saraswati, the Hindu goddess of knowledge, music, art, wisdom, and education. The importance of Saraswati Chalisa for devotees, students, and artists lies in the following ways such as “for academic success, creativity and attainment of knowledge”, “for increased learning ability, memory and intelligence” etc. Along with these, “For one’s speech, communication skills and confidence in public speaking”, “For internal development, self-awareness”, and “For purifying mind and thoughts” and you can get blessings from Goddess Saraswati by praying to Goddess Saraswati by chanting Shri Saraswati Chalisa.

श्री सरस्वती चालीसा पाठ के साथ यह भी पढ़ें। Read these Chalisa, along with Shri Saraswati Chalisa.

Maa Saraswati Chalisa Lyrics in Hindi with Meaning

श्री सरस्वती चालीसा पढ़ने के बाद अब नए भाग पर जाएँ जो अर्थ सहित श्री सरस्वती चालीसा है। After reading Shri Saraswati Chalisa, now go through on new part which is Shri Saraswati Chalisa with meaning in Hindi. Here is Saraswati Chalisa Hindi lyrics with meaning or arth.

॥ दोहा ॥
जनक जननि पद कमल रज,निज मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। रामसागर के पाप को, मातु तुही अब हन्तु॥

हिंदी अर्थ – मातृ-पितृ के पाद-कमलों की धूल मस्तक पर स्थापित होते हुए वन्दनीय हे सरस्वती देवी, मैं आपको नमन करता/करती हूँ, हे विद्या-दात्री, कृपया मुझे बुद्धि की शक्ति प्रदान कीजिए। आपकी अपार और अनन्त महिमा पूरे विश्व में व्याप्त है। हे मातृ, रामसागर के पापों का नाश अब आप ही कर सकती हैं।

॥ चौपाई ॥

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥
जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥

हिंदी अर्थ – बुद्धि की शक्ति की संरक्षिका अर्थात् समस्त ज्ञान शक्ति को संजीवनी देने वाली हे सरस्वती माता, आपकी जय हो। सर्वविद्या स्वरूपिणी, अजर-अमर, अचिंतनीय आपकी महिमा को मैं नमन करता/करती हूँ। अपने हाथों में वीणा धारण करने वाली और हंस पर सवारी करने वाली मातृ सरस्वती, आपकी जय हो।

रूप चतुर्भुजधारी माता। सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती। जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥

हिंदी अर्थ – हे माँ, आपका चार भुजायुक्त स्वरूप पूरे विश्व में मशहूर है। जब-जब इस दुनिया में पाप, बुद्धि – अर्थात विनाशकारी और अपवित्र वैचारिक कृत्य बढ़ते हैं, तब धर्म की ज्योति फीकी पड़ जाती है।

तबहि मातु ले निज अवतारा। पाप हीन करती महि तारा॥
बाल्मीकि जी थे बहम ज्ञानी। तव प्रसाद जानै संसारा॥

हिंदी अर्थ – हे माँ, तब आप अवतार स्वरूप ग्रहण करती हैं और इस भूमि को पापमुक्ति दिलाती हैं। हे माता सरस्वती, जिन वाल्मीकि जी के खिलाफ हत्या की योजना रची जा रही थी, उन्हें आपसे जो प्रसाद प्राप्त हुआ, उसे पूरा जगत जानता है।

रामायण जो रचे बनाई। आदि कवी की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता। तेरी कृपा दृष्टि से माता॥

हिंदी अर्थ – आपकी कृपा दृष्टि से ही रामायण की रचना की गई और उन्होंने आदिकवि की उच्च पदवी प्राप्त की। हे मातृ, आपके दया दृष्टि से ही कालिदास जी प्रसिद्ध हुए।

तुलसी सूर आदि विद्धाना। भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा। केवल कृपा आपकी अम्बा॥

हिंदी अर्थ – तुलसीदास, सूरदास जैसे विद्वान और भी कितने ही ज्ञानी व्यक्ति मिले, उन्हें और किसी के साथ चलने की आवश्यकता नहीं थी, ये सब आपकी कृपा से ही विद्वान बने हैं माता।

करहु कृपा सोइ मातु भवानी। दुखित दीन निज दासहि जानी॥
पुत्र करै अपराध बहूता। तेहि न धरइ चित सुन्दर माता॥

हिंदी अर्थ – हे मां भवानी, वैसे ही मुझ जैसे दीन-दुखी को अपना दास मानकर अपनी आशीर्वाद दीजिए। हे मातृ, पुत्र तो बहुत से अपराध करते हैं, अनेक गलतियां करते हैं, कृपा करके आप उन्हें अपने ह्रदय से न जुड़ने दें, अर्थात मेरी गलतियों को माफ करें और उन्हें भूल जाएं।

राखु लाज जननी अब मेरी। विनय करूं बहु भांति घनेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा। कृपा करउ जय जय जगदंबा॥

हिंदी अर्थ – हे माँ, मैं कई विधियों से आपकी प्रार्थना करता हूँ, कृपया मेरी गरिमा की रक्षा करें। मुझे एक अनाथ के रूप में आपका सहारा चाहिए। हे मातृ जगदंबा, अपनी कृपा दिखाइए, आपकी विजय हो, जय हो।

मधु कैटभ जो अति बलवाना। बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना॥
समर हजार पांच में घोरा। फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥

हिंदी अर्थ – मधु और कैटभ जैसे शक्तिशाली राक्षस ने भगवान विष्णु के खिलाफ युद्ध करने का निश्चय किया, तो पांच हजार वर्षों तक युद्ध करने के बाद भी विष्णु भगवान ने उन्हें मारने में विफल रहे।

मातु सहाय भई तेहि काला। बुद्धि विपरीत करी खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी। पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥

हिंदी अर्थ – हें मां, तब आपने ही भगवान विष्णु की सहायता की और राक्षसों की बुद्धि को उलट दिया। इस प्रकार उन राक्षसों का नाश हो गया। हे मातर, मेरी इच्छा भी पूरी करें।

चंड मुण्ड जो थे विख्याता। छण महुं संहारेउ तेहि माता॥
रक्तबीज से समरथ पापी। सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी॥

हिंदी अर्थ – चंड-मुंड जैसे प्रमुख राक्षस के वध को आपने तत्कालिकता से पूरा किया। रक्तबीज जैसे ताकतवर पापी जिनसे देवता, ऋषि-मुनि सहित पूरी पृथ्वी भय से कांपने लगी थी।

काटेउ सिर जिम कदली खम्बा। बार बार बिनवउं जगदंबा॥
जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा। छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥

हिंदी अर्थ – हे मां, आपने उस दुष्ट का सिर अत्यंत सरलता से काट कर जैसे कि केले को खाया। हे जगदंबा माता, मैं बार-बार आपकी प्रार्थना करता हूँ, आपको प्रणाम करता हूँ। हे मातृ, पूरे संसार में अत्यंत पापी रूपी शुंभ-निशुंभ नामक राक्षसों का आपने एक ही क्षण में संहार किया।

भरत-मातु बुधि फेरेउ जाई। रामचन्द्र बनवास कराई॥
एहि विधि रावन वध तुम कीन्हा। सुर नर मुनि सब कहुं सुख दीन्हा॥

हिंदी अर्थ – हे माँ सरस्वती, आपने वही अपनी शक्तिशाली बुद्धि से भरत की माता केकैयी को प्रेरित किया और भगवान श्रीरामचंद्र को वनवास भेजने का काम किया। इसी प्रकार रावण का वध भी आपने संभावना से अधिक उत्कृष्ट तरीके से करवाया, जिससे देवताओं, मनुष्यों, ऋषि-मुनियों आदि को सुख प्रदान किया।

को समरथ तव यश गुन गाना। निगम अनादि अनंत बखाना॥
विष्णु रूद्र अज सकहिं न मारी। जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥

हिंदी अर्थ – आपकी विजय गाथाएँ अनादि काल से प्रारंभ होकर अनन्त तक प्रस्तुत हैं, इसलिए आपके यश की महिमा का वर्णन करने की कोई सीमा नहीं हो सकती। जिनकी संरक्षणकर्ता के रूप में आप विद्यमान हैं, उन्हें न तो भगवान विष्णु और न ही भगवान शिव के रूप में कोई भी मार सकता है।

रक्त दन्तिका और शताक्षी। नाम अपार है दानव भक्षी॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा। दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥

हिंदी अर्थ – क्त दंतिका, शताक्षी, दानव भक्षी – ऐसे अनगिनत नामों से आप पुकारी जाती हैं। हे मातर, अत्यन्त कठिनाईयों का समाधान करने के लिए सम्पूर्ण विश्व ने आपको दुर्गा कहकर सम्मानित किया है।

दुर्ग आदि हरनी तू माता। कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
नृप कोपित जो मारन चाहै। कानन में घेरे मृग नाहै॥

हिंदी अर्थ – हे मां, आप कष्टों की विनाशिनी हो, जब आप प्रसन्न होती हैं, सुख की प्राप्ति होती है, यानि सुखदायिनी होती हैं। जब किसी राजा क्रोध में विलीन होता है, या जंगल में बर्बर जीवों से घिरा होता है…

सागर मध्य पोत के भंगे। अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में। हो दरिद्र अथवा संकट में॥

हिंदी अर्थ – अथवा समुद्र के मध्यभाग में, जब किसी के साथ सहायक नहीं होता और तूफान से घिर जाते हैं, भूत प्रेत की चिंता करते हैं या फिर दरिद्रता या किसी अन्य प्रकार की कठिनाइयाँ आती हैं…

नाम जपे मंगल सब होई। संशय इसमें करइ न कोई॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई। सबै छांड़ि पूजें एहि माई॥
करै पाठ नित यह चालीसा। होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा॥
धूपादिक नैवेद्य चढावै। संकट रहित अवश्य हो जावै॥

हिंदी अर्थ – हे मां, आपके नाम की जपने पर ही सभी समस्याएँ दूर हो जाती हैं, यह एक निश्चितता है कि आपके नाम की जपने से अत्यधिक कठिनाइयों का भी नाश होता है, दूर हो जाते हैं। जो संतानहीन हैं, वे और सभी को त्यागकर आपकी पूजा करें और दैनिक रूप में इस चालीसा का पाठ करें, तो उन्हें गुणवान और सुंदर संतान की प्राप्ति होगी। साथ ही मातर, धूप और आरती के साथ-साथ नैवेद्य चढ़ाने से समस्त संकटों का निवारण हो जाता है।

भक्ति मातु की करै हमेशा। निकट न आवै ताहि कलेशा॥
बंदी पाठ करें शत बारा। बंदी पाश दूर हो सारा॥
करहु कृपा भवमुक्ति भवानी। मो कहं दास सदा निज जानी॥

हिंदी अर्थ – जिसने माता की भक्ति की है, उसके पास किसी प्रकार का कष्ट नहीं आता, उसके करीब कोई दुःख नहीं आता। जिसने सौ बार बंदी पाठ किया है, उसके बंदी पाश दूर हो जाते हैं। हे माता भवानी, सदा मेरे दास के रूप में, आप मेरे पर कृपा करें और इस संसारिक समुद्र से मुक्ति प्रदान करें।

॥ दोहा ॥

माता सूरज कान्ति तव,अंधकार मम रूप। डूबन ते रक्षा करहु,परूं न मैं भव-कूप॥
बल बुद्धि विद्या देहुं मोहि,सुनहु सरस्वति मातु। अधम रामसागरहिं तुम,आश्रय देउ पुनातु॥

हिंदी अर्थ – हे मां, आपका प्रकाश सूर्य के समान चमकता है, जबकि मेरा रूप अंधकार की तरह अप्रकाशित है। मुझे इस भवसागर रूप कुंआ में डूबने से बचाएं। हे मां सरस्वती, मुझे शक्ति, बुद्धि और विद्या का उपहार प्रदान करें। हे मां, इस पापी रामसागर को आपकी शरण में लेकर पवित्र करें।

||इति श्री सरस्वती चालीसा समाप्त ||

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